International
Tiger Day 2020
Tigers
are considered as an 'Umbrella Species' as their conservation saves many other
animal species. India has doubled its tiger population ahead of the target year
of 2022. Project Tiger, launched in 1973, has been a success story despite the
seemingly insurmountable challenges of poaching, loss of habitat, human and
wildlife conflict and climate change.
International
Tiger Day is held on July 29 every year. It was launched in 2010 after the
Saint Petersburg Tiger Summit. The Summit was held to raise awareness about the
sharp decline in the number of wild tigers, leaving them on the brink of extinction.
Not
only tigers, there are 30,000 elephants, 3,000 one-horned rhinoceros and over
500 lions in the various wild life sanctuaries of the country.
Across
the world there are currently 13 tiger range countries - India, Bangladesh,
Bhutan, Cambodia, China, Indonesia, Lao PDR, Malaysia, Myanmar, Nepal, Russia,
Thailand and Vietnam.
विश्व बाघ दिवस
हर
साल पूरे विश्व में 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है। भारत का राष्ट्रीय पशु
है। यह देश की शक्ति,
शान, सतर्कता, बुद्धि
और धीरज का प्रतीक माना जाता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र
को छोड़कर पूरे देश में पाया जाता है। शुष्क खुले जंगल, नम
और सदाबहार वन से लेकर मैंग्रोव दलदलों तक इसका क्षेत्र फैला हुआ है। चिंता की बात
ये है कि बाघ को वन्यजीवों की लुप्त होती प्रजाति की सूची में रखा गया है। लेकिन
राहत की बात ये है कि 'सेव द टाइगर'
जैसे राष्ट्रीय अभियानों की बदौलत देश में
बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है।
बाघ
संरक्षण के काम को प्रोत्साहित करने,
उनकी घटती संख्या के प्रति लोगों को जागरूक
करने के लिए साल 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने की घोषणा हुई थी। इस सम्मेलन में मौजूद विभिन्न
देशों की सरकारों ने 2022 तक बाघों की आबादी को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया था।
क्या
है इस दिवस का महत्व ?
बाघों
की लुप्त होती प्रजातियों की ओर ध्यान आकर्षित करने, उनकी
रक्षा करने और बाघों के पारिस्थितिकीय महत्व बताने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस
मनाया जाता है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक
साल 2017 में 116 और 2018 में 85 बाघों की मौत हुई है। 2018 में
हुई गणना के अनुसार बाघों की संख्या 308 है। साल 2016 में 120 बाघों की मौतें हुईं थीं, जो साल
2006 के बाद सबसे ज्यादा थी। वहीं, साल
2015 में 80 बाघों की मौत की पुष्टि की गई थी। इस दिवस के जरिए बाघ के संरक्षण
के प्रति जागरूक किया जाता है।
बाघों
को लेकर अच्छी खबर क्या है?
बाघों
के बारे में यह जानकर आपको खुशी होगी कि देश में बाघों की संख्या बढ़ी है। विश्व
बाघ दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार को ही देश में बाघों की गणना की विस्तृत
रिपोर्ट जारी करते हुए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने यह
जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुनिया के 70 फीसदी
बाघ भारत में मौजूद हैं। मालूम हो कि बाघों की गणना की प्रारंभिक रिपोर्ट पिछले
साल ही आ चुकी है। इसमें देश में बाघों की संख्या में भारी बढ़ोतरी का खुलासा हुआ
था। साल 2018 की रिपोर्ट के तहत देश में बाघों की संख्या बढ़कर 2967
हो गई है। पूर्व में हुई गणना के लिहाज से देखा जाए तो साल 2014
के मुकाबले 741 बाघों की बढ़ोतरी हुई है।
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